दाल /छोले /अन्य

दालें शाकाहारी भोजन के लिए बहुत महत्वपूर्ण होती हैं. भारत में दाल, रोटी, और चावल एक आम आदमी से लेकर खास तक सबके खाने की थाली में होती हैं. दालों में प्रोटीन प्रचुर मात्रा में होता है और यह फोलिक एसिड और फाइबर का भी अच्छा स्रोत हैं. कुछ दालों में आइरन भी पाया जाता है. डॉक्टर्स के अनुसार अगर आप एक कटोरी दाल रोजाना खाते हैं तो फिर आपको पूरे दिन के लिए पर्याप्त प्रोटीन मिल जाता है.

दाल का उपयोग बहुमुखी है. दाल मुख्य खाने में तो चावल के साथ परोसी ही जाती है, साथ ही साथ इनका प्रयोग सूप, सलाद, विभिन्न प्रकार के नाश्ते, एवं मिठाइयों में भी किया जाता है. यहाँ पर हम कुछ दालों को मुख्य भोजन के साथ परोसने के लिए बना रहे हैं.

Soyabeans सोयाबीन - सोयाबीन प्रोटीन का भी बहुत अच्छा स्रोत है और इसमें फाइबर की मात्रा भी ज़्यादा होती है और साथ ही साथ इसमें मैग्नीशियम और आइरन के अंश भी होते हैं. कुल मिलाकर सोयाबीन स्वास्थ्य का खजाना होता है. आप इसे करी के साथ बना सकते हैं और चावल के साथ परोस सकते हैं या फिर इसे सूखा बना सकते हैं नाश्ते के लिए. आप सोयाबीन की टिक्की, कबाब, भरवाँ पराठे इत्यादि कई प्रकार के व्यंजन बना सकते हैं.
Mangaudi ki Kadhi मंगौड़ी की कढ़ी– जब मैं छोटी थी तो हमारे वैष्णव परिवार में मंगौड़ी का बहुत प्रयोग होता था. राजस्थानी/ मारवाड़ी खाने में आमतौर पर मंगौड़ी का काफ़ी इस्तेमाल होता है. मंगौड़ी की कढ़ी एक बहुत ही स्वादिष्ट और आसानी से बनने वाली डिश है.मंगौड़ीको मूंगदाल के पेस्ट से बनाया जाता है और फिर इसे धूप में सुखाते हैं और फिर इसे डिब्बे में स्टोर कर सकते हैं और ज़रूरत के अनुसार इसका प्रयोग किया जा सकता है. तो चलिए फिर आज ...........
Lazeez Moong Dal लज़ीज़ मूँग दाल- लज़ीज़ मूँग दाल एक बहुत ही आसानी से और फटाफट बनने वाला नाश्ता है. ये स्वादिष्ट होने के साथ-साथ सेहतमंद भी है. मूँग दाल प्रोटीन का बहुत अच्छा स्रोत है. लज़ीज़ मूँग दाल बनाने की यह विधि शुचि की रसोई की एक नियमित पाठिका काजल की है. काजल ने यह विधि हमें बताई और हमसे गुज़ारिश की कि मैं उन्हे यह विधि नाप-तौल के साथ विस्तार से बनाना बताऊं... तो चलिए फिर बनाते हैं लज़ीज़ मूँग दाल. ...... ..
Panchmel Dal पंचमेल दाल- पंचमेल दाल अपने नाम के अनूरूप ही पाँच दालों को मिलकर बनाई जाती है और यह भी राजस्थान की ख़ासियत है. इस दाल को बाटी के साथ परोसा जाता है. पंचमेल दाल स्वादिष्ट होने के साथ पौष्टिक भी होती है. यह प्रोटीन का एक अच्छा स्रोत्र है. दाल और बाटी के साथ एक खास राजस्थानी मिठाई भी बनाई जाती है जिसे चूरमा कहते हैं. तो चलिए फिर सबसे पहले बनाते हैं पंचमेल दाल....
Sookhi moong dal सूखी मूँग दाल- मूँग दाल प्रोटीन का बहुत अच्छा सोत्र है. सूखी मूँग दाल एक बहुत ही आसानी से और फटाफट बनने वाला नाश्ता है. ये स्वादिष्ट होने के साथ-साथ सेहतमंद भी है. इस दाल बनाने में भी बहुत कम समय लगता है . तो अगर आपके बच्चे दाल नही खाना चाहते हैं तो आप उनको मूँग दाल इस रूप में खिलाइए फिर देखिए इस दाल की फरमाइश रोज आएगी.....
kale chane काले चने- काले चने में प्रोटीन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है. रविवार के नाश्ते के लिए यह डिश बिल्कुल उपयुक्त है. अगर आप चाहें तो इसमें प्याज, आलू, टमाटर इत्यादि सब्जियाँ डाल सकते है जो इसके स्वाद को और बढ़ा देता है. तो बनाइए इस रविवार को काले चने.......
 Gujarati_Kadhih गुजराती कढ़ी - कढ़ी वैसे तो संपूर्ण भारत में जानी जाती है लेकिन यह ख़ासतौर पर उत्तर और पाश्चिम भारत की बहुत ही लोकप्रिय डिश है. कढ़ी कई प्रकार कि होती है जैसे, कढ़ी पकौड़ी, मगौंडी की कढ़ी, सिंधी कढ़ी, राजस्थानी कढ़ी, गुजराती कढ़ी.. इत्यादि-इत्यादि. गुजराती कढ़ी बनाने में बहुत आसान और खाने में अति उत्तम होती है. गुजराती कढ़ी उत्तर ...
 Gatte_Ki_Subjih गट्टा करी /गट्टे की सब्जी- गट्टा करी या फिर गट्टे की सब्जी मारवाड़ी/ राजस्थानी विशेषता है. बिना प्याज लहसुन के बनने वाला यह व्यंजन खाने में बहुत स्वादिष्ट होता है. गट्टे की करी को आमतौर दही से बनाते हैं, कढ़ी के जैसे.. वैसे कुछ रेस्टोरेंट वाले इस डिश को प्याज और टमाटर की करी में भी बनाते हैं. तो आप भी बनाइए इस यह स्वादिष्ट राजस्थानी व्यंजन और हमेशा की तरह लिखना ना भूलें अपनी राय......
लौकी चने की दाल  लौकी चने की दाल - लौकी चने की दाल ना केवल स्वादिष्ट होती है बल्कि बहुत ही फ़ायदेमंद भी रहती है. दाल और सब्जियों का संगम तो हमेशा ही अच्छा रहता है, विटामिन्स और प्रोटीन साथ-साथ. जो लोग लौकी खाना नही पसंद करते हैं, वो भी इस दाल को बहुत शौक से खाते हैं. आप इस दाल को वैष्णव तरीके से बना सकते हैं या फिर रेस्टोरेंट स्टाइल प्याज के साथ. हम आपको दोनों ही तरीके से तड़का बनाना बता रहे हैं.
Dal Makhani दाल मक्खनी - दाल मक्खनी अपने नाम के अनुरूप मक्खन में बनाई जाती है और बहुत स्वादिष्ट होती है. राजमा और साबुत उड़द को मिलाकर बनायी गयी इस दाल में दूध या फिर क्रीम भी डाली जाती है. आमतौर पर दाल मक्खनी पार्टियों के लिए बनाई जाती है.
Urad Dal उड़द की दाल-सफेद उड़द की दाल में प्रोटीन और घुलनशील फाइबर बहुतायत में पाया जाता है. उड़द दाल को स्वास्थ के लिए बहुत लाभकारी माना जाता है. यहाँ पर मैने उड़द दाल को पारंपरिक उत्तर भारतीय तरीके से बनाया है.
Rajma राजमा - राजमा उत्तर भारत की बहुत ही प्रसिद्ध साबुत दाल है. राजमा में घुलनशील फाइबर बहुतायत में होता है. इसमें प्रोटीन , आइरन , और  मैग्नीशियम आदि भी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है. राजमा और चावल का कोम्बो पूरे उत्तर भारत में बहुत पसंद किया जाता है.
Arhar Dal अरहर की दाल - इस दाल का प्रयोग पूरे भारतवर्ष में होता है. अरहर दाल उत्तरी भारत में रोजमर्रा में बनने वाली दाल है. इसके शौकीन अगर दो चार दिन तक अरहर नहीं खाते हैं तो उन्हें इस दाल की तलब लगने लगती है.
masoor Dal मसूर की दाल मसूर की दाल कई रंगों में आती है. भारतवर्ष में तो नहीं, लेकिन फ्रांस में हरे रंग की मसूर भी आती है. उत्तर भारत में साबुत मसूर और धुली हुई मसूर (लाल), दोनों का ही प्रयोग किया जाता है. मसूर की दाल काफ़ी हल्की मानी जाती है, और खाने में भी बहुत स्वादिष्ट होती है.
lobiya लोबिया - पोटेशियम का एक अच्छा स्रोत है, और साथ ही साथ इसमें मैग्नीशियम और तांबे के अंश भी होते हैं. लोबिया में और दालों के मुक़ाबले में फाइबर की मात्रा ज़्यादा होती है, और यह प्रोटीन का भी बहुत अच्छा स्रोत है. लोबिए को चावल के साथ परोसिए, तो यह बहुत अच्छा कौंबो बन जाता है.
chole छोले- छोले उत्तर भारत, ख़ासतौर पर पंजाब, की लोकप्रिय डिश है. बाज़ारों में भी छोले चावल या छोले भटूरे के ठेले आम तौर पर दिखाई दे ही जाते हैं. कानपुर में एक दुकान के उपर बोर्ड लगा रहता है "शास्त्री जी का कहना है, छोले खा कर रहना है!"
paalak ka saag पालक का साग --हरी मूँग की दाल और पालक की पत्तियों के साथ बनाया हुआ साग बहुत ही पौष्टिक होता है. साग लोहे और प्रोटीन का अच्छा स्रोत है. साग आमतौर पर रोटी के साथ सर्व किया जाता है.
khichdi खिचड़ी- खिचड़ी दाल और चावल से बनने वाली एक बहुत हल्की और आसान डिश है. और यह बहुत ही पौष्टिक भी है. भारत के विभिन्न प्रांतों में खिचड़ी अलग अलग तरह से बनाई जाती है. यहाँ हम उत्तर भारतीय शैली में खिचड़ी बनाने जा रहे हैं.
Kadhi कढ़ी -कढ़ी चावल उत्तर भारत का एक बेहद पसंदीदा कौंबो है. आमतौर पर इसे दोपहर के खाने में ही सर्व किया जाता है क्योंकि बेसन की तासीर थोड़ी भारी होती है. नैनीताल से थोड़ी दूर पर एक जगह है जिसका नाम नौकुचियाताल है, वहाँ पर कढ़ी चावल हर छोटे बड़े रेस्टोरेंट में मिलते हैं.
sambhar सांभर- सांभर एक दक्षिण-भारतीय अरहर दाल से बनने वाली डिश है. सांभर की ख़ासियत यह है की इसमें दाल के साथ सब्जियाँ भी डाली जाती हैं तो आपको प्रोटीन और विटामिन एक साथ मिल जाता है. सांभर को डोसा, उत्तपम, इडली, अप्पम, इत्यादि के साथ परोसा जाता है. ..