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11 अप्रैल-2021

नयी पुस्तक- “स्वाद सेहत और शाकाहार“

प्रिय पाठकों,

आप सबके प्यार और निरतर सहयोग से लम्बे इंतज़ार के बाद मेरी पहली किताब “स्वाद सेहत और शाकाहार“ अब बाज़ार में आ रही है। इस पुस्तक में आयुर्वेद और आज के विज्ञान से जुड़े स्वस्थ भोजन और सामग्री के ९ लेख और ८४ पारंपरिक भारतीय भोजन की व्यंजन विधियाँ हैं। पुस्तक में प्राचीन आयुर्वेद की पुस्तकों, और विज्ञान की शोध से जुड़े लगभग १५० सन्दर्भ हैं।

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तेल कौन सा अच्छा होता है? मधुमेह के लिए कौन सा भोजन ठीक है? स्वादिष्ट भोजन कैसे बनाएँ कि स्वाद के साथ सेहत भी बनी रहे? खाने की तासीर क्या होती है? कच्चा और पक्का खाना किसे कहते हैं? ऐसी तमाम जानकारियाँ समेटे है मेरी नयी पुस्तक "स्वाद, सेहत और शाकाहार: आयुर्वेद से आज तक"। आयुर्वेद के संदेशों को आज के विज्ञान के धागों से गूँथ कर लिखी ये पुस्तक सरल शब्दों में बताती है कि छोटे छोटे बदलाव करके सेहत-भरा भोजन कैसे बना सकते हैं।

पुस्तक की बुकिंग शुरू हो गयी। प्री आर्डर करने पर प्रकाशक की तरफ से १०% छूट है। आप इस लिंक पर किताब आर्डर कर सकते हैं।

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साभार,
शुचि


शाकाहारी प्रोटीन | भारतीय खाने में प्रोटीन

आजकल शाकाहारी भोजन में प्रोटीन की मात्रा को लेकर बहुधा प्रश्न उठते हैं। प्रोटीन को लेकर यह भ्रम फैला हुआ है कि शाकाहारी लोगों को सम्पूर्ण प्रोटीन नही मिलता। भारत में तो सदियों से शाकाहार का चलन है और पहले तो कभी भी प्रोटीन को लेकर कोई मुद्दा नही उठा फिर अचानक ऐसा क्यों है? यह भ्रम मांसाहारी से शाकाहारी बने लोगों की चिंता से जन्मा है। विदेश में प्रोटीन को सीधे सीधे मासांहार से जोड़ा जाता है इसीलिए नए शाकाहारी बने लोगों को यह डर रहता है कि उन्हें पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन नही मिल रहा है। तो इस लेख में प्रोटीन के बारे में जानते हैं, समझते हैं कि हमारे भोजन में प्रोटीन किस प्रकार के होते हैं और आयुर्वेद और पारम्परिक भारतीय भोजन शैली कैसे आधुनिक विज्ञान के इस “प्रोटीन” ज्ञान से जुड़ी है।

प्रोटीन हमारे शरीर के लिए अति आवश्यक तत्व हैं जो बहुत सारे छोटे छोटे अवयवों से मिलकर बने होते हैं जिन्हें अमीनो एसिड कहते हैं। हमारे शरीर में कई प्रकार के प्रोटीन हैं। प्रोटीन मांसपेशियों, ऊतक, हड्डियों और अन्य सभी अंगों के विकास और किसी भी प्रकार की टूट फूट की मरम्मत के लिए अति आवश्यक हैं। हमारे बाल, नाखून, आदि के लिए भी हमें प्रोटीन की आवश्यकता होती है। अमीनो एसिड कुल मिलाकर 20 प्रकार के होते हैं जिनमें से 9 मुख्य अमीनो एसिड हैं जो हमें हमारे खाने से मिलते हैं और बाकी के 11 अमीनो एसिड हमारा शरीर खुद बना लेता है। तो रोज़ाना में हमें ऐसा भोजन की आवश्यकता है जिससे हमें यह 9 अति आवश्यक अमीनो एसिड मिलें, जो हमारी प्रोटीन की जरूरत को पूरा कर सकें।

शाकाहारी भारतीय खाने में भरपूर प्रोटीन होता है। दाल चावल, रोटी, सब्जी, भड़भूजे में भुने चने, इडली चटनी सांभर, दलिया, दूध, दही, पनीर सभी प्रोटीन, खनिज, आदि से भरपूर हैं तो पारंपरिक रूप से घर पर बनाये गए खाने में सभी जरूरी तत्व मौजूद हैं। यहाँ तक कि एक सबसे आसानी से बनने वाली सीधी सादी भारतीय खिचड़ी में भी सम्पूर्ण प्रोटीन होता है:)

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शाकाहारी प्रोटीन के बारे में और पढ़ें


पत्ता गोभी, गाजर और मटर की सब्जी

  •  Cabbage carrot and peas

    पत्ता गोभी, गाजर और मटर की सब्जी

    पत्ता गोभी के साथ गाजर और मटर को मिलाकर हमने यहाँ एक स्वादिष्ट और पौष्टिक मौसमी सब्जी बनाई है. इस सब्जी को ज्यादा पकाया नहीं जाता है तो सब्जी चटपट बन जाती है और स्वाद में लाजवाब होती है. इन सभी सब्जियों में विटामिन और खनिज से भरपूर होता है. लहसुन के बनाई गयी है तो यह वैष्णव सब्जी है, वीगन भी है और मधुमेह रोगियों के लिए कम कैलोरी की भी है. आगे पढ़ें ...

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मिठाई | मिष्टी

कृत्रिम स्वादों से दूर प्राचीन, पारम्परिक और स्वादिष्ट भारतीय मिठाइयाँ जिन्हें गेहूँ के आटे, घी और शक्कर से बनाया गया है! आप भी बनाइये आटे का लड्डू , शकरपारे, आटे का शीरा और चूरमा!

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सफेद तिल

आयुर्वेद में तिल की बहुत प्रशंसा की गयी है. तिल को कटु, मधुर और तिक्त रस युक्त बताया गया है. इसे पित्तनाशक और कफ नाशक भी बताया गया है. तिल में कैल्शियम बहुतायत में होता है, इसके साथ ही साथ इसमें फासफ़ोरस और कई प्रकार के खनिज और विटामिन भी होते हैं.बाज़ार में दो प्रकार के सफेद तिल आते हैं, एक महीन छिलके के साथ जो कि हल्का गुलाबी-भूरा होता है, और एक बिना छिलके के जो एकदम सफेद होता है. स्वास्थ्य के लिहाज से छिलके वाला तिल अति उत्तम है. छिल्के वाले तिल में कैल्शियम की मात्रा लगभग दोगुनी होती है. तिल से नाना प्रकार के पकवान बनाए जाते हैं. जैसे कि, मिठाइयाँ, नमकीन, करी, चटनी इत्यादि कई प्रकार की ब्रेड बनाने में भी इनका प्रयोग होता है.

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  •  Baingan Aloo

    पातरा/ पात्रा

    पातरा/ पात्रा जिसे पतौड़े के नाम से भी जाना जाता है एक बहुत स्वादिष्ट और बहुत कम चिकनाई से बनने वाला नाश्ता है. पातरा को अरबी/ घुइयाँ के पत्तों से बनाया जाता है. गर्मी और बारिश के मौसम में यह पत्ते भारत में आसानी से सब्जी मंडी में मिल जाते हैं, लेकिन शायद विदेश में मिलना मुश्किल हो. मैं तो अपनी बगिया में गर्मी के मौसम में घुइयाँ/ अरबी उगाती हूँ जिससे हर 20-25 दिन में ताजे पत्ते आते रहते हैं और तीन चार बार तो सीजन में पातरा बन ही जाता है. वैसे आप विकल्प के तौर पर कोलार्ड के पत्ते से भी पातरा बनाने की कोशिश कर सकते हैं....read more...

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    शुचि और शुचि की रसोई के बारे में दूसरी वेबसाइट पर पढ़ें !

    आप शुचि के द्वारा लिखे कुछ लेख, और शुचि की रसोई के बारे में दूसरी वेबसाइट पर भी पढ़ सकते हैं. शुचि की रसोई को कुछ व्यंजन स्थानीय अखबार और मासिक पत्रिकाओं में नियमित रूप से प्रकाशित होते हैं, जिनमें मुख्य रूप से आयुर्वेद के, शाकाहारी व्यंजन, बागवानी, सेहत आदि विषयों से सम्बंधित लेख हैं. read more...

  •  samosa chaat

    जीरा आलू

    जीरा आलू, मसाला आलू, सूखे आलू या फिर आलू के गुटके- नाम चाहे जो भी हो लेकिन यह एक आलू की सब्जी उत्तर भारत की बहुत ही लोकप्रिय सूखी सब्जी है. उत्तर भारत में सूखे आलू अरहर की दाल-चावल और रोटी के साथ रोजाना में बनने वाली सब्जी है. आलू की सब्जी बच्चों को भी बहुत पसंद होती है. जीरा आलू को बनाना बहुत आसान है लेकिन स्वाद में यह लाजवाब है. वैसे तो आप में से बहुत सारे पाठक इस सब्जी से परिचित होंगे लेकिन आगे पढ़ें...

कुछ लेख रसोई से सम्बंधित!

यहाँ हम आपको रसोई से सम्बंधित कुछ लेख बतायेंगें जैसे कि रसोई को अच्छे से व्यवस्थित करने के कुछ गुण, बर्तन को ठीक से व्यवस्थित करना, घर की बगिया में कुछ सब्सियों को उगने के गुण, घी तेल के गुण, कुछ मसालों के बारे में, कुछ और्वेद से सम्बंधित लेख, कुछ आज के विज्ञान और नयी शोध जिनसे बेहतर स्वस्थ जीवन को अपनाया जा सकता है आदि.

  • गाजर और मिर्च का अचार

    गाजर और मिर्च का अचार

    गाजर और मिर्च का अचार स्वादिष्ट और चटपट बनने वाला अचार है जिसके लिए आपको बहुत ही कम मसलों कि जरूरत जो आमतौर पर सभी भारतीय घरों में इस्तेमाल होते हैं. इस अचार का आईडिया मुझे एक रेस्टोरेंट से मिला. कुछ समय पहले हमने शिकागो शहर में एक भारतीय रेस्टोरेंट में भरवाँ पराठे के साथ इसे खाया था. खाने में यह आचार बहुत स्वादिष्ट और अचार से ज्यादा सलाद के जैसा लग रहा था.....आगे पढ़ें ..

वैष्णव खाना

बिना प्याज लहसुन का खाना वैष्णव भोजन/खाना कहलाता है। कुछ जगहों पर इसे स्वामीनारायण भोजन भी कहते हैं। पूजा-पाठ और भगवन के खाने में विशेष रूप से प्याज लहसुन का प्रयोग किया जाता है। तीज- त्योहारों में और कई बार पार्टियों में भी ऐसा खाना बनाया जाता है, और ख़ास तौर पर व्रत के दिनों में भी।

हालांकि पौराणिक ग्रंथों में ऐसा लिखा है कि लहसुन अमृत तुल्य है (लहसुन का वर्णन देवासुर संग्राम के दौरान आता है - कहानी ये है कि जब समुद्र मंथन के बाद अमृत निकला तो राहु ने चुपके से उसे पीना चाहा। तब विष्णु जी ने उसका गला काट दिया। इस दौरान कुछ अमृत की बूँदें पृथ्वी पर छिटक गयीं, और उनसे बना लहसुन !) आयुर्वेद में भी लहसुन का कई जगह वर्णन है। लहसुन को बहुउपयोगी रसायन बताया गया है और इसके प्रयोग को उत्तम स्वास्थ्य हेतु आवश्यक बताया गया है।

तो मुझे प्याज लहसुन न खाने का जो कारण सबसे सटीक लगता है वो शायद इनकी महक का बहुत तेज होना है। तो शायद सल्फर की वजह से ही बहुत सारे शाकाहारी लोग प्याज लहसुन नहीं खाते हैं।

शुभकामनाओं के साथ
शुचि


  •  samosa chaat

    समोसा चाट

    समोसे की प्रसिद्धि देश-विदेश तक है. पारंपरिक मसालेदार आलू भर कर बनाए गये समोसे इस हद तक प्रसिद्द है कि बॉलीवुड के गाने भी इस पर बन गए जैसे जब तक समोसे में आलू रहेगा... समोसा चाट उत्तर भारत की बहुत प्रसिद्द चाट है.इसको बनाने के लिए हम छोले के साथ समोसे को सर्व करते हैं और इसके ऊपर धनिया की चटनी, मीठी चटनी, दही आदि से इसे सजाकर परोसते हैं. आगे पढ़ें ...



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